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मेहनत और किस्मत: गीता और जादुई सिक्के का रहस्य - हिंदी कहानी

क्या किस्मत सच में होती है? पढ़िए गीता की यह प्रेरणादायक कहानी और जानिए कैसे एक जादुई सिक्के ने बदली उसकी सोच। मेहनत ही असली जादू है। Motivational Stories | Moral Stories

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भाग्य के भरोसे बैठी गीता

एक छोटे से सुंदर शहर 'रामपुर' में एक प्यारी सी बच्ची रहती थी, जिसका नाम था गीता। गीता पढ़ने में होशियार थी, लेकिन उसे एक बहुत बुरी आदत थी। वह हर चीज़ के लिए अपनी मेहनत और किस्मत की तुलना करती रहती थी और अक्सर मेहनत से ज्यादा किस्मत पर भरोसा करती थी।

अगर कभी उसके कम नंबर आते, तो वह कहती, "आज मेरी किस्मत खराब थी।" अगर वह दौड़ में हार जाती, तो कहती, "आज मेरा दिन अच्छा नहीं था।" गीता को लगता था कि दुनिया में जो कुछ भी होता है, वह सब भाग्य (Luck) का खेल है। उसके माता-पिता और शिक्षक उसे समझाते थे कि सफलता पाने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है, लेकिन गीता को लगता था कि अगर किस्मत साथ दे, तो बिना हाथ-पैर हिलाए भी सब कुछ मिल सकता है।

जादुई सिक्के की खोज

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एक दिन शाम को गीता पार्क में खेल रही थी। खेलते-खेलते उसकी नज़र झाड़ियों के पास पड़ी एक चमकती हुई चीज़ पर गई। उसने पास जाकर देखा तो वह एक पुराना, तांबे का सिक्का था। उस सिक्के पर अजीब सी लकीरें बनी हुई थीं और वह सूरज की रोशनी में सोने की तरह चमक रहा था।

गीता ने उसे उठा लिया। उसने मन ही मन सोचा, "यह जरूर कोई जादुई सिक्का है! आज मेरी किस्मत चमक गई। अब मुझे किसी भी चीज़ के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। यह सिक्का मुझे हर परीक्षा में पास करा देगा।"

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गीता उस सिक्के को अपनी मुट्ठी में भींचकर घर ले आई। उसे लगा कि अब उसके पास दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है। यह बच्चों की हिंदी कहानियां (Hindi Stories for Kids) जैसा रोमांचक लग रहा था, लेकिन असलियत कुछ और ही होने वाली थी।

परीक्षा और अति-विश्वास

अगले हफ्ते गीता की गणित (Maths) की परीक्षा थी। हमेशा गीता परीक्षा के लिए थोड़ी बहुत पढ़ाई करती थी, लेकिन इस बार उसने किताब खोली ही नहीं। उसकी माँ ने पूछा, "गीता, तुम पढ़ क्यों नहीं रही हो? परसों तुम्हारा पेपर है।" गीता ने लापरवाही से कहा, "माँ, आप चिंता मत करो। इस बार मेरी किस्मत बहुत अच्छी है। मैं बिना पढ़े ही क्लास में टॉप करूँगी।"

गीता ने वह 'जादुई सिक्का' अपनी पेंसिल बॉक्स में रख लिया। उसे पूरा भरोसा था कि यह सिक्का उसे सारे सवालों के जवाब बता देगा या फिर पेपर बहुत आसान आएगा।

परीक्षा का दिन आ गया। गीता बड़े आत्मविश्वास के साथ स्कूल गई। जैसे ही प्रश्न-पत्र (Question Paper) उसके हाथ में आया, उसके होश उड़ गए। पेपर बहुत कठिन था। उसे एक भी सवाल का जवाब ठीक से नहीं आता था। उसने बार-बार उस सिक्के को छुआ, अपनी आँखों से लगाया, लेकिन जादुई सिक्के ने कोई मदद नहीं की। न तो सवालों के जवाब हवा में लिखे हुए आए और न ही टीचर ने उसे नक़ल करने दी।

परिणाम वही हुआ जो होना था। गीता परीक्षा में बहुत कम नंबरों से पास हुई। वह घर आकर अपने कमरे में बंद होकर रोने लगी। उसने उस सिक्के को दीवार पर दे मारा और चिल्लाई, "यह सिक्का बेकार है! मेरी किस्मत ही खराब है!"

दादी की सीख और असली जादू

गीता की दादी, जो बहुत समझदार थीं, ने गीता का रोना सुना। वे उसके कमरे में आईं और प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा। "क्या हुआ बेटा? तुम उस बेचारे सिक्के को क्यों कोस रही हो?" दादी ने पूछा।

गीता ने सिसकते हुए कहा, "दादी, मुझे लगा था कि यह लकी (Lucky) सिक्का है। इसके भरोसे मैंने पढ़ाई नहीं की, और आज मेरे गंदे नंबर आए। मेहनत और किस्मत में से मेरी किस्मत ने मुझे धोखा दिया।"

दादी मुस्कुराईं और बोलीं, "बेटा, सिक्का कोई जादू नहीं करता। जादू तुम्हारे हाथों में और तुम्हारे दिमाग में होता है। चलो, मैं तुम्हें एक शिक्षाप्रद कहानी (Moral Story) सुनाती हूँ।"

दादी ने बताया, "एक बार एक किसान था। वह रोज मंदिर जाकर भगवान से प्रार्थना करता था कि उसके खेत में ढेर सारा अनाज उग जाए, लेकिन वह कभी खेत जोतने नहीं जाता था। वह सोचता था कि भगवान की कृपा होगी तो फसल अपने आप उग जाएगी। दूसरी तरफ, उसका पड़ोसी रोज सुबह उठकर खेत में पसीना बहाता था। जब फसल कटने का समय आया, तो प्रार्थना करने वाले किसान के खेत में सिर्फ घास-फूस थी, जबकि मेहनती किसान का घर अनाज से भर गया था।"

दादी ने गीता की आँखों में देखते हुए कहा, "किस्मत उस ताले की तरह है, जिसकी चाबी का नाम मेहनत है। बिना चाबी घुमाए, ताला कभी नहीं खुलता। तुमने सिक्के पर भरोसा किया, लेकिन अपनी मेहनत पर नहीं। अगर तुम पढ़ाई करतीं और फिर इस सिक्के को साथ ले जातीं, तो शायद तुम्हें आत्मविश्वास मिलता। लेकिन सिर्फ सिक्के के भरोसे बैठकर तुमने अपनी नाकामी को खुद न्योता दिया।"

यह बात गीता के दिल में उतर गई। उसे समझ आ गया कि वह गलत थी। यह प्रेरणादायक कहानी (Motivational Story in Hindi) अब गीता की जिंदगी बदलने वाली थी।

गीता का संकल्प और बदलाव

अगले महीने स्कूल में 'वार्षिक चित्रकला प्रतियोगिता' (Painting Competition) होने वाली थी। गीता को पेंटिंग करना बहुत पसंद था, लेकिन वह हमेशा आलस करती थी। इस बार उसने ठान लिया कि वह किस्मत के भरोसे नहीं बैठेगी।

उसने बाजार से नए रंग खरीदे और रोज शाम को अभ्यास करना शुरू किया। वह घंटों बैठकर रंगों को मिलाना सीखती, नई-नई आकृतियां बनाती। उसकी उंगलियों में दर्द होता, लेकिन वह रुकती नहीं थी। उसने उस 'जादुई सिक्के' को अपनी दराज में सबसे नीचे डाल दिया था। अब उसका जादू उसकी मेहनत थी।

प्रतियोगिता के दिन, गीता ने एक सुंदर 'उगते हुए सूरज और खेत' का चित्र बनाया। उसने अपनी पूरी जान उस चित्र में डाल दी। जब परिणाम घोषित हुए, तो मंच से नाम पुकारा गया - "प्रथम पुरस्कार... गीता!"

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पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। गीता खुशी से झूम उठी। जब वह ट्रॉफी लेने मंच पर गई, तो उसे लगा कि असली चमक उस तांबे के सिक्के में नहीं, बल्कि इस सोने की ट्रॉफी में है जो उसने अपनी मेहनत से कमाई है।

मेहनत ही असली किस्मत है

घर आकर गीता ने दादी को अपनी ट्रॉफी दिखाई। दादी ने उसे गले लगा लिया। गीता ने कहा, "दादी, आज मुझे समझ आ गया। मेहनत और किस्मत अलग नहीं हैं। हम जितनी ज्यादा मेहनत करते हैं, हमारी किस्मत उतनी ही अच्छी होती जाती है।"

उस दिन के बाद से गीता ने कभी किसी जादुई चमत्कार का इंतजार नहीं किया। वह जान गई थी कि उसकी किस्मत की लकीरें उसके हाथों में नहीं, बल्कि उसके माथे के पसीने में छिपी हैं।

बच्चों, सफलता की कहानियों (Success Stories) की तरह हमें भी गीता से यह याद रखना चाहिए कि सफलता का कोई शॉर्टकट (Shortcut) नहीं होता। लॉटरी का टिकट खरीदने के लिए भी पैसे कमाने पड़ते हैं और पैसे कमाने के लिए काम करना पड़ता है।

इस कहानी से सीख (Moral of the Story):

  1. कर्म ही पूजा है: बिना मेहनत किए सिर्फ भाग्य के भरोसे बैठने से असफलता ही हाथ लगती है।

  2. आत्मविश्वास: जब हम मेहनत करते हैं, तो हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है, जिसे कोई 'बैड लक' नहीं हरा सकता।

  3. असली जादू: दुनिया का सबसे बड़ा जादू हमारी कड़ी मेहनत और लगन है।

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Tags: Motivational Stories for Kids, Hard Work vs Luck, Hindi kahaniyan, Lotpot Stories, Bedtime Stories

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